**__तुम चल पड़े हो जिनपे उन राहों को देखिये, जो मुन्तजिर हैं फैली, उन बाहों को देखिये, दिखते हैं जमाने के हसीं मंजर तुम्हें तमाम, जो देखती हैं तुमको उन निगाहों को देखिये, जिस हुश्ने-बेमिशाल ने रख दी उड़ा के नींद, आज आ के हुश्न की उन अदाओं को देखिये, घुलतीं जो कानों में कभी शहद के मानिन्द, अब दूर से आती हैं उन सदाओं को देखिये। 💝__**